Thursday, October 19, 2017

जाह्नवी का जुनून


शक्ति स्वरूपा - 3 जाह्नवी के पति की गांव में ही चाय की दुकान थी, जिससे परिवार का गुजर बसर होता था। दुकान पर हर तरह के लोग आते थे, लिहाजा पति को शराब की लत लग गई। कमाई का बड़ा हिस्सा शराब पर खर्च होने लगा, वहीं जाह्नवी और बच्चों के साथ बात-बेबात रोज की झिकझिक पति की आदत हो गई। शराब के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों की वजह से पति असमय ही मौत के मुंह में समा गया। इसके साथ ही जाह्नवी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। रिश्तेदार और पड़ोसी कब तक मदद करते। खुद और तीनों बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी के भी लाले पड़ने लगे। फॉल-पीको-सिलाई करके किसी तरह गृहस्थी की गाड़ी खींच रही थी। इस बीच गांव में कॉन्वेंट स्कूल खुला तो जाह्नवी ने वहां आया की नौकरी कर ली। बच्चों को संभालने में अपना दुख-दर्द भूल जाती। मिडिल पास जाह्नवी के कान छोटे बच्चों के क्लासरूम पर लगे रहते। उसे लगा, इन बच्चों को वह पढ़ा सकती है। बीतते हुए समय के साथ उसने छोटी कक्षाओं के पाठ्यक्रम पर कमांड हासिल कर ली। जाह्नवी की लगन देखकर स्कूल के संचालक ने उसे छोटे बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी दे दी। बच्चों के प्रति मधुर व्यवहार को देखते हुए कई अभिभावकों से ट्यूशन पढ़ाने का ऑफर भी मिल गया। स्कूल और ट्यूशन से बचे हुए समय में फॉल-पीको-सिलाई का काम अब भी नहीं छूटा है। बड़े बेटे को न पढ़ा पाने का मलाल तो उसे है, जो कच्ची उम्र में कमाने को मजबूर हो गया, लेकिन दोनों बेटों को पढ़ाने का कर्तव्य वह बखूबी निभा रही है। अपनी लगन और मेहनत से उसने साबित कर दिया है कि हालात चाहे कितने भी प्रतिकूल क्यों न हों, दृढ़ इच्च्छाशक्ति हो तो इनसे पार पाना कतई मुश्किल नहीं है। 24 September 2017

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