Thursday, November 8, 2007

ज्योतिपवॅ दीपावली पर मंगलकामनाएं



दीवाली का पवॅ अलौकिक
नव ज्योति जगमगा रही,
जन-जन का पथ आलोकित हो
यह अभिलाषा जगा रही।।

दीवाली का पवॅ सुनहरा
आतिशबाजी न्यारी-न्यारी,
देख पटाखे और फुलझड़ियां
बच्चों की गूंजे किलकारी।

यहां-वहां हर गली-मोहल्ला
जिधर देखिए उधर तैयारी,
खुशियां बांटें, नाचें गाएं
बच्चे-बूढे़ सब नर नारी।

साभारः भाई किशन

धन की देवी मां लक्षमी और बुद्धि के दाता भगवान विनायक की कृपादृष्टि आप और आपके परिजनों, मित्रजनों पर बनी रहे इन्ही शुभकामनाओं के साथ
आप सबका सुहृद
मोहन मंगलम्

3 comments:

परमजीत बाली said...

सुन्दर रचना है।बधाई।
दिवाली मुबारक!

राजीव जैन said...

तो आप कवि‍ताबाजी भी कर लेते हैं

शुभ दीपावली

नितिन व्यास said...

शुभ दीपावली!