Saturday, November 3, 2007

कुछ मीठा हो जाए ...


त्यौहार का माहौल है, बाजार सज रहे हैं, सपने खिल रहे हैं, उनमें रंग भरने के प्रयास जारी हैं। ऐसे शुभ दिनों में उन लोगों को भी मिठाई का स्वाद लेने का मौका मिल सकेगा, जो पहले इनके बारे में सोचकर ही रह जाते थे। जी हां, यह सब कुछ संभव हो रहा है गोमाता की कृपा से।
........तो चलें हम उस स्थान विशेष पर। राजस्थान के अजमेर जिले का एक शहर है किशनगढ़। वहां रहती हैं किन्नर सुरेश उफॅ सुशीला। (भाषा में लिंग निरधारण नहीं कर पा रहा हूं, सो स्त्रीलिंग ही मान लें ) उन्होंने दो गायें पाल रखी हैं मोना और गीता। तो यूं हुआ कि पिछले साल दीपावली पर इन गायों ने किशनगढ़ बाजार में मिठाई की दुकान पर मुंह मार दी, तो हलवाई ने उन्हें पलटे की दे मारी। गोपाल-भक्त और गोप्रेमी सुशीला को इससे बड़ी ठेस पहुंची और उन्होंने उस हलवाई को सबक सिखाने के लिए मिठाई की अस्थायी दुकान खुलवा दी। इस दुकान पर २५ रुपए किलो में शुद्ध घी की मिठाइयां खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी।
इसी सुशीला ने इस बार भी किशनगढ़ के एसडीएम राजेंद्र सारस्वत से चार स्थानों पर दुकानें खोलने की अनुमति मांगी है। इन दुकानों पर देशी घी की मिठाइयां १० रुपए किलो और वनस्पति घी की मिठाइयां ५ रुपए किलो मिलेंगी। उन गायों को पलटे मारने वाला हलवाई अपनी किसम्त के पलटा खाने की कसक से उबर नहीं रहा होगा, उसकी गलती की सजा शहर के दूसरे हलवाइयों को भी भुगतनी पड़ रही है, लेकिन इसका दूसरा उज्ज्वल पहलू है कि अब ऐसे हजारों बच्चे ही नहीं, उनके मां-बाप भी मिठाइयों का लुत्फ उठा सकेंगे, जो लाचारी के कारण ललचाई आंखों से मिठाइयों को ताकने भर के लिए ही मजबूर हुआ करते थे।
बढ़ती महंगाई के दौर में कीमतें कम नहीं होंगी, इसका अहसास तो हमें भी है, लेकिन यह आशा तो हम कर ही सकते हैं कि तरक्की की रफ्तार बढ़ती रहेगी, हर हाथ को काम मिलेगा और जेब में दाम होंगे। फिर -----मन के लड्डू फीके क्यों.......वाली कहावत को मानवता झुठला सकेगी। तो हम कृतज्ञता ज्ञापित करें सुशीला किन्नर के प्रति और कामना करें कि जब उसका हृदय मूक पशु के लिए द्रवित हो सकता है तो हमारी आंखें भी दीन-हीन मनुपुत्रों के दुख से नम हो सकेंगी।

3 comments:

आशीष said...

शानदार ख़बर

काकेश said...

अच्छी खबर.क्या यह मिठाइयां दिल्ली में नहीं आ सकती हम भी खा लेते. ;-)

http://kakesh.com

suresh said...

Subh Prabhat

My Dear sir
Very good.

Regards

Suresh Pandit
Email: biharssangathan@yahoo.com