Monday, October 18, 2010

हवा का रुख तो भांपो

बड़े-बुजुर्ग कहा करते हैं कि हवा का रुख भांपकर ही कोई काम करना चाहिए। किसानों के लिए तो यह कई मायने में बहुत ही जरूरी हुआ करता है। हवा का रुख देखकर ही तय करते हैं कि किस हवा का प्रभाव उनकी फसलों के लिए कैसा रहेगा। बारिश के मौसम में मैंने कई बार पिताजी को कहते सुना करता था कि किस नक्षत्र में किस हवा के प्रभाव से बरसात हुआ करेगी और यह अक्सर सच भी साबित हुआ करती थी। विशेषकर गेहूं और धान तैयार करते समय हवा की उपादेयता काफी महत्वपूर्ण हुआ करती है। अब तो कई बार किसानों को टेबल फैन या पेडेस्टल फैन लगाकर भी गेहूं से भूसा उड़ाते देखने का मौका मिल जाता है। समुद्र में मछली पकड़ने वाले मछुआरों के लिए हवा का रुख का आकलन जीविका ही नहीं, जीवन के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण होता है।
हवा के रुख की महत्ता का अहसास आज सुबह बेटे ने कराया। वह अपनी कॉलोनी के सामुदायिक केंद्र में सामूहिक रूप से आयोजित रावण-दहन देखने गया था। वहां जब रावण के पुतले में आग लगाई गई तो आधा ही पुतला जल पाया। बच्चा कह रहा था कि आग लगाने वालों ने हवा का रुख भांपे बिना आग लगा दी, जिससे ऐसा हुआ और लोगों को रावण-दहन का पूरा मजा नहीं आया। कल रात को ऑफिस में भी फोटोग्राफर कह रहे थे कि कई स्थानों पर रावण के पुतले अधजले रह गए, या फिर उन्हें जलाने में अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ी और दर्शकों का मजा भी किरकिरा हुआ। ऐसे में यह सोचने पर विवश होना पड़ता है कि विज्ञान चाहे जितनी तरक्की कर ले लेकिन पुराने समय से चली आ रही मान्यताओं की उपयोगिता कभी खत्म नहीं हो सकेगी।

2 comments:

अशोक बजाज said...

बहुत अच्छी जानकारी के लिए आभार .

sudhakar soni,cartoonist said...

aap bhi hawaa ka rukh bhanplar post likhte ho.....bilkul samayik aur achchhi post!