Tuesday, December 4, 2007

अंतिम ही हो अंतिमा की मौत?

राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार चार दिन बाद अपने शासन के चार साल पूरे पर होने वाले जश्न की तैयारियों में जुटी है, अभी हाल ही हुए --रिसरजेंट राजस्थान--में उद्यमियों द्वारा डेढ़ लाख करोड़ रुपए से भी अधिक के निवेश की घोषणा से बेरोजगार युवकों की आंखों में सपने पलने लगे हैं, वहीं पिंकिसटी के एक इलाके विशेष लक्षमीनारायणपुरी में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। दूषित पानी ने सोमवार को राजेश पटवा और मीना से उनकी एक वषॅ की मासूम बच्ची अंतिमा को छीन लिया।
--जल ही जीवन है--इस सूक्ति वाक्य का अथॅ लक्षमीनारायणपुरी और इसके आसपास के इलाके में जल के जहर बन जाने से अपना अथॅ खो चुका है। दूषित पानी के कारण १५ नवंबर से शुरू हुआ मौतों का यह सिलसिला अब तक तीन बच्चों और दो अधेड़ों की जान ले चुका है। मौत की खबरें अखबारों की सुरखियां बन रही हैं, लेकिन जलदाय मंत्री दावा कर रहे हैं कि शहर में कहीं भी दूषित पानी की सप्लाई नहीं हो रही और चिकित्सा मंत्री इन मौतों को राजनीतिक स्टंट बताते नहीं थकते। मौत के शिकार हुए परिवारों का रुदन इन्हें सुनाई नहीं देता और बीमार लोगों की परेशानियों से इनकी पेशानी पर बल नहीं आते। मिनरल वाटर पीने वाले इन नेताओं को नलों में आने वाले लाल-नीले-गंदले पानी का सच क्योंकर नजर नहीं आता, यह समझ से परे है। ऐसे में अपन ईश्वर से प्राथॅना करें कि सरकार को शीघ्र ही सदबुद्धि आएगी, दूषित पानी के बदले स्वच्छ जल की सप्लाई होगी, जल जहर नहीं बल्कि अमृत ही बना रहेगा। अंतिमा की मौत दूषित पानी से हुई अंतिम ही मौत होगी और थम जाएगा यह असमय मौत का सिलसिला।

2 comments:

दुष्यंत said...

लिखो भाई लिखते रहो ,लिखने में ही गति है ,खुदा करे जोरेकलम और ज़्यादा .....

suresh said...

Very Good

Regards
Suresh Pandit, jaipur