Wednesday, March 5, 2008

हैप्पी मैरिज एनिवर्सरी टू बम-बम भोले


गुरुवार को महाशिवरात्रि है। आज के दौर में विशेष अवसरों पर एसएमएस और ई-मेल से आने वाले संदेशों की भूमिका बढ़ गई है और लोग अपने प्रियजनों को इस तरह के संदेश भेजना और पाना हमारी दिनचर्या में शुमार हो गया है। तो साहब, मुझे भी आज यानी बुधवार को ही एक मित्र का एसएमएस संदेश मिला--`भगवान शिव के जन्मदिन का पर्व महाशिवरात्रि आपके लिए मंगलमय हो´। संदेश पाकर मैं यह सोचने को विवश हो गया कि एक स्थापित मान्यता किस प्रकार हर अवसर पर लागू होने लगती है। जब मैंने उक्त मित्र को फोन करके मैसेज के बारे में पूछा तो उनका सहज उत्तर था कि भगवान राम के जन्म की खुशी में रामनवमी मनाई जाती है, भगवान कृष्ण के जन्म की खुशी में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है तो शिवरात्रि भी भगवान शिव के जन्मदिन पर ही तो मनाई जाती होगी। मैंने उनकी अज्ञानता का निवारण किया तो सोचा कि अधिकांश लोग इस तथ्य से अवगत होंगे, फिर भी कुछ लोग यदि नावाकिफ हों तो उन तक भी यह जानकारी पहुंचाई जानी चाहिए।
भगवान शिव की महिमा अपरम्पार है और देश के हर हिस्से में गली-मोहल्लों में हर चौराहे पर भगवान शिव के मंदिर इसके प्रमाण हैं। इनकी पूजा-अर्चना के लिए कोई विशेष तामझाम की आवश्यकता नहीं होती। हमारे आसपास सहज उपलब्ध आक-धतूरे के फूल, भांग, बिल्वपत्र चढ़ाने और जलाभिषेक मात्र से वे प्रसन्न हो जाते हैं। बात दीगर है कि जिनके पास उपलब्ध है, वे दूध ही क्या पंचामृत तक से शिव का अभिषेक करते हैं, सोने-चांदी के नाग-नागिन और आभूषण भी चढ़ाते हैं। धर्मशास्त्रों में शिव को इतना सरल बताया गया है कि उनका नाम ही भोला बाबा रख दिया गया और उनका क्रोध इतना प्रचंड है कि तीसरी आंख खुले तो प्रलय हो जाए।
भगवान शिव संभवत: ऐसे पहले देवता होंगे जिनकी शादी की वर्षगांठ पर इस तरह का उत्सवी माहौल होता है। हालांकि धर्मप्राणों की नगरी जयपुर को छोटी काशी कहा जाता है, इससे स्पष्ट है कि यहां भगवान शिव की भक्ति की रेटिंग क्या है। गुरुवार को भक्त यहां के प्रसिद्ध झाड़खंड महादेव, ताड़केश्वर महादेव, राजराजेश्वर महादेव, एकलिंगेश्वर महादेव मंदिरों के अलावा गली-मोहल्लों के शिव मंदिरों में औढरदानी भगवान भगवान भोले की आराधना में लीन रहेंगे।
कई शहरों में महाशिवरात्रि की शाम को शिव बारात की झांकी सजाई जाती है और तीन-चार किलोमीटर लंबा जुलूस निकाला जाता है। इसमें आगे-आगे वृषभ नंदी पर भगवान शिव विराजमान होते हैं और उनके पीछे उनके गणों और भूत-प्रेतों की बारात होती है। फिर उसके पीछे अन्य झांकियां और बैंड-बाजे, हाथी-घोड़ों का लवाजमा होता है। आयोजकों में शिव बारात को साकार करने की प्रतिस्पर्धा होती है। ऐसे दृश्य देखने के बाद बच्चा-बच्चा महाशिवरात्रि मनाने का उद्देश्य समझ जाता है और फिर मेरे मित्र ने जिस तरह का एसएमएस मुझे भेजा, इसकी गुंजाईश कदापि नहीं रहती।
मुझे मिले मैसेज को सुधार करते हुए मैं तो भगवान नीलकंठ को यही कहूंगा- `हैप्पी मैरिज एनिवर्सरी टू बम बम भोले´।
आप सब पर भगवान शिव और जगज्जननी पावॅती की मंगलमयी कृपा रहे, इन्हीं शुभकामनाओं के साथ अपनी अल्पज्ञता को सावॅजनिक करने के लिए क्षमा चाहता हूं।