Thursday, August 2, 2007

बदलता जमाना, बदलता व्यवहार

बदलता जमाना, बदलता व्यवहार
आज सुबह एक अखबार में खबर पढ़ी कि जयपुर में एक सज्जन को किसी शातिर बदमाश युवक ने नशीली वस्तु मिली छाछ पिलाकर नकदी, आभूषण, मोबाइल हैंडसेट, कऱेडिट काडर् आदि लेकर चंपत हो गया। यूं तो राष्ट्रीय ध्वज हर भारतीय के लिए शान का पऱतीक है, लेकिन ये सज्जन तो इसकी रक्षा के लिए तन-मन-धन से समपिर्त हैं। उक्त बदमाश उनके पास आया और उनसे राष्ट्रीय ध्वज के मान-सम्मान की रक्षा के लिए उनके पऱयासों की काफी पऱशंसा की। उसने राष्ट्रीय ध्वज के बारे में और भी जानकारी चाही। उसे ड्राइंग रूम में बिठाकर वे घर के अन्दर संबंधित पुस्तकें लेने चले गए। वे पुस्तक लेकर लौटे तो उस युवक ने अपनी झोली में छाछ की दो थैलियां निकालीं। एक तो खुद पी ली दूसरी उन्हें पीने को दी। भलमनसाहत में वे छाछ पी गए। इसके कुछ देर बाद ही वे बेहोश हो गए। इसके बाद वह युवक कमरे में से नकदी, जेवरात, मोबाइल हैंडसेट, कऱेडिट काडर् आदि लेकर चंपत हो गया। उसने कऱेडट काडर् से ५० हजार की खरीदारी भी कर ली। काफी देर बाद उन सज्जन को होश आया तो उन्हें उपरोक्त युवक की कारगुजारी का पता चला और वे पुलिस की शरण में जाने को बाध्य हुए।
अब सवाल यह उठता है कि कोई आपके घर पर आपसे मिलने आता है, आपसे कुछ ऐसी बातें पूछता है जिनमें आप निष्णात हैं, तो क्या महज इस बिना पर उसे वापस लौटा दें कि हो सकता है कि वह भी बदमाश हो। ऐसे में बुजुगोर् के अनुभव से आसपास के लोग वंचित नहीं हो जाएंगे। बस-ट्रेनों में, बस स्टैंड, स्टेशनों पर जहरखुरानी की घटनाएं तो आम हैं, लेकिन आपके घर आकर कोई आपके साथ इस तरह की वारदात कर जाए, तो आप क्या महसूस करेंगे। क्या घर के अंदर किसी को बुलाने से पहले मेटल डिटेक्टर या लाइ डिटेक्टर से उसकी चरित्र की परीक्षा की जाए। मानव पर से मानव का विश्वास तो उठता ही जा रहा है, रही-सही कसर भी ऐसी वारदात से पूरी हो जाएगी। आज जब हम ग्लोबल विश्व की कल्पना कर रहे हैं, इंटरनेट के माध्यम से एक-दूसरे की दूरी कम होती जा रही है, हम अपने

2 comments:

आशीष said...

sahi hai....bhai

हर्षवर्धन said...

भरोसा ही टूट गया तो क्या बचेगा